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सही लोन कैसे चुने? | Interest, EMI और Loan Tenure की पूरी जानकारी हिंदी में

सही लोन कैसे चुने?


ज्यादातर लोग जिंदगी मे कूछ सपने पुरे करने के लिये लोन लेते हा | लोन एक सुविधा है और इस सुविधा का इस्तेमाल करते समय हमे इसकी किमत ब्याज कर रूप मे चुकानी पडती है |हर कोई लोन लेता है |लोग घर बनाने ,घर खरीदने , गाडी खरीदने , हायर एजूकेशन , अपनी जरुरते पुरी करने , बिझनेस बढाने वगेरह के लिये लोन लेते है |जब लोन का सही इस्तेमाल किया जाता है , तो वे आपकी फायनानशीयल स्थिती अच्छी कर सकते है |लेकीन उलटी स्थिती मे ,वे फायनानशीयल बर्बादी का कारण बन सकते है |

आजकल लोन लेना आसान है , लेकीन सही लोन चुनना बहुत जरुरी है | अगर आपने गलत लोन ले लिया , तो आपको ज्यादा ब्याज ( Interest ) देना पड  सकता है  , इससे आप ज्यादा कर्ज मे डूब जाते हो |इससे आपका  फायनानशिअल तनाव बढता है

इस ब्लॉग मे हम सही लोन कैसे चुने ? और इसके साथ साथ  Interest (ब्याज )  क्या होता है ब्याज  दर (interest )  क्या होता है EMI कैसे काम करती है लोन Tenure ( कालावधी ) कैसे चुने ?  यह सब समझेंगे

Interest  ( ब्याज  )  क्या होता है ?

जब व्यक्ति बँक या किसी वित्तीय संस्था से पैसा उधार या कर्ज के रूप मे लेता है , तो उस पैसे के  इस्तमाल के बदले उसे ज्यादा पैसा देना पडता है , उस पैसे को ब्याज (Interest ) कहते है |

सरल भाषा मे कहे तो , जितना पैसे का कर्ज लिया उस पर कूछ अतिरिक्त पैसा , मतलब ब्याज हुआ

ब्याज  दर (interest Rate )  क्या होता है ?

 ब्याज  दर बहुत महत्वपूर्ण होती है | यह प्रतिशत मे बताई जाती है ,जैसे कि , % , १० % आदी |कर्ज का ब्याज दर ज्यादा होगा , तो कर्ज महंगा हो जायेगा और अगर ब्याज दर कम होगी तो कर्ज ( लोन ) सस्ता मिलेगा |

   उदाहरण - अगर आपने ५००००/- का लोन लिया और ब्याज दर १० % है , तो १ साल मे आपका ब्याज ५००० /- रुपये जायेगा |

Interest  ( ब्याज  ) के प्रकार 

ब्याज  के प्रकार दो तरह के होते है |

. निश्चित ब्याज दर  ( Fixed Interest rate )  -

निश्चित ब्याज दर मे पुरी लोन कि अवधि मे ब्याज दर एक जैसी रहती है | इस प्रकार मे ब्याज दर के साथ साथ EMI भी फिक्स रहती है |बाजार के बदलाव से लोन के ब्याज दर पर कोई फर्क नही पडता |निश्चित ब्याज दर principle रक्कम पर ब्याज लगता है |  

उदाहरण - अगर आपने लोन १० % के ब्याज दर पे किया है , तो पुरी लोन के समय मे १० % ही ब्याज दर रहेगा  और लोन कि EMI भी निश्चित रहेगी |

. परिवर्तनशील ब्याज दर ( Floating interest rate ) -

परिवर्तनशील ब्याज दर समय समय पर बदलता रहता है |बाजार यानी RBI rate के अनुसार दर ऊपर - नीचे होता रहता है | इस प्रकार मे ब्याज दर के साथ साथ EMI भी बढ  सकती है |ब्याज दर कम होने पर आपको फायदा होता है और ज्यादा होने पर आपको थोडा ज्यादा ब्याज देना पडता है | परिवर्तनशील ब्याज दर मे ब्याज पर भी ब्याज लगता है |

उदाहरण -  मान लीजिये , आपने १ लाख का लोन लिया | जब आपने लोन लिया तब ब्याज दर १० % था |तब आपको १०००० /- रुपये ब्याज देना पडेगा | एक साल बाद जब ब्याज दर १० % से गिरकर ९ % होता है , तब आपको ९००० /- ब्याज देना पडेगा |इसका मतलब हमे एक साल बाद १००० /- रुपये कम देने पडे | लोन कि अवधि मे ऐसे बदलाव हर साल होते रहते है |

EMI क्या होती है

ईएमआई ( EMI -Equated Monthly Installment ) का मतलब है , आप जब लोन लेते है , तब उसकी हर महिने दि जाने  वाली तय किस्त , जिसे आप धीरे धीरे चुकाते है |EMI वह निश्चित मासिक राशी है , जो आप हर महिने बँक को देते है , जिसमे दो हिस्से शामिल होते है , प्रिंसिपल और ब्याज |

. Principle ( मुलधन ) - Principle यानी जो आपने पैसा उधार लिया है |

.ब्याज -  ब्याज प्रिंसिपल लोन राशी पर लगता है |  

 मान लीजिये , आपने बँक या वित्तीय संस्था से ५०००० /- का लोन लिया है | अब आपको यह पैसा एक साथ वापस नही देना होता , बल्की हर महिने थोडा थोडा करके देना होता है | इसी महिने के किस्त को EMI कहते है |

 उदाहरण - अगर आपने १००००० /- का लोन लिया है , वो भी १० % ब्याज दर पर एक साल के लिया है |तो आपकी EMI लगभग ८९०० /- के आसपास हो सकता है |

लोन कि EMI कैसे निर्धारित होती है ?

लोन कि EMI तीन चीजो पर निर्भर करती है |

. लोन कि राशी -

बँक से ली गई लोन राशी पर EMI निर्भर करती है | जितनी बडी लोन कि राशी होती है , उतनी ज्यादा EMI होती है | EMI सीधे कर्ज कि राशी के तुलना मे बढती है |

उदाहरण - मान लीजिये आपने  ५ लाख का लोन किया तो आपको कम EMI लगेगी | वैसे हि आपने १० लाख का लोन लिया तो आपको तुलना मे EMI लगभग दोगुनी लगेगी |

.ब्याज दर ( Interest rate ) -

ब्याज दर EMI का सबसे संवेदनशील कारक होता है | ब्याज दर थोडा भी बढे , तो उसका प्रभाव EMI आता है |हर बँक का ब्याज दर अलग - अलग लोन के लिये अलग -अलग हो सकता है |कूछ लोन मे , लोन लेने वाले व्यक्ती कि इनकम , कर्ज चुकाने कि क्षमता , क्रेडीट हिस्ट्री  कि वजह से बँक का ब्याज दर ज्यादा कम हो सकता है |

. समय अवधि ( Tenure ) - 

लोन लेते समय लोन कि समय अवधी निश्चित होती है | समय अवधि का EMI पर बडा असर होता है | समय अवधि जितनी लंबी होगी , उतना EMI कम होगा | ज्यादा समय के लिये ज्यादा ब्याज जाता है , लेकीन EMI कम होती है

लोन Tenure ( कालावधी ) कैसे चुने ?

लोन का कालावधी चुनते समय सबसे पहली अपनी  मासिक इनकम और खर्चो को समझना जरुरी होता है |आसान भाषा मे कहे , तो आपके लोन कि EMI आपके मासिक इनकम के ३० % - ४० % होना चाहिये | इससे  हमे लोन सही तरह और आराम से चुका सकते है | अगर EMI ज्यादा लगे तो लोन चुकाने का समय बढा देना चाहिये , यह आपके लिये फ़ायदेमंद हो सकता है |

कम कालावधी लेने पर ब्याज कम जाता है , लेकीन EMI  ज्यादा जाती है | वही ज्यादा समय लेने पर EMI कम होती है , लेकीन ब्याज ज्यादा जाता है | इसलिये आपके मासिक इनकम और आपको EMI भरने मे आरामदायक लगे|

इसे हम उदाहरण से समझते है | मानलीजिये , आप  १० लाख का लोन १० % ब्याज दर पर ३ साल के लिये लेते है , तो आपकी EMI ज्यादा होगी , लेकीन आपको कुल ब्याज कि रक्कम कम लगेगी | वही अगर आप यही लोन ५ साल के लिये लेते है  , तो EMI कम होगी , लेकीन कुल ब्याज कि रक्कम ज्यादा देने पडेगी |याने कि कम समय मे आप लोन जल्दी चुका सकते हो और पैसे भी बचा सकते हो |

अगर आपकी नौकरी पर्मनंट है और आपकी इनकम स्थिर है , तो आप कम समय के लिये लोन लेना चाहिये |लेकीन मासिक इनकम कम - ज्यादा होती रहती है और आपके खर्चे भी बडे है , तो आपको ज्यादा समय के लिये लोन लेना सही है |


सही लोन कैसे चुने ?

सही  लोन चुनना थोडा समझदारी का काम होता है |गलत तरीके का लोन चुनने से हम फायनानशिअल समस्या आ सकती है | इसलिये हमे सही तरीके का लोन चूनना चाहिये | आसान भाषा मे समझते है ,

  •         सबसे पहले ये तय करो कि , आपको लोन किस लिये चाहिये | जैसे कि घर लेने के लिये , गाडी खरीदने के लिये या वैयक्तिक खर्च के लिये लोन लेते है | यह तय करने का कारण है , कि लोन के प्रकार पर लोन का ब्याज दर निर्धारित होता है | जैसे कि , वैयक्तिक लोन महंगा होता है और होम लोन सस्ता होता है | अपने जरुरत के हिसाब से लोन लो |
  •        हमेशा कम ब्याज वाला लोन चुने |अलग - अलग बँक के ब्याज दर कि तुलना करे | जिस बँक मे कम ब्याज है , उसी बँक से लोन ले |
  •        प्रोसेसिंग फी , प्रीपेमेंट चार्जेस और लेट पेमेंट पेनल्टी ऐसे गुप्त चार्जेस पर ध्यान दे | बँक अक्सर ऐसे चार्जेस बताते नही है , इसलिये बँक को पहिले पुछना जरुरी है |
  •        लोन लेने से पहिले आपको EMI कितना आयेगा , इसकि जानकारी बँक से  लो |

निष्कर्ष -

अंत में यही कहा जा सकता है कि लोन एक उपयोगी वित्तीय साधन है, लेकिन इसे समझदारी और सही जानकारी के साथ लेना बेहद जरूरी है। अगर आप बिना सोचे-समझे या जल्दबाजी में लोन लेते हैं, तो यह आपके लिए आर्थिक बोझ बन सकता है। वहीं, सही प्लानिंग और सही चुनाव के साथ लिया गया लोन आपके सपनों को पूरा करने में मदद करता है और आपकी फाइनेंशियल प्रोफाइल को मजबूत बनाता है।

लोन लेने से पहले हमेशा अपनी जरूरत, ब्याज दर, EMI, और लोन की अवधि को अच्छे से समझें। अपनी आय के अनुसार ही EMI तय करें ताकि आपको भविष्य में किसी प्रकार का आर्थिक तनाव न हो। साथ ही, अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करना और छुपे हुए चार्जेस की जानकारी लेना भी उतना ही जरूरी है।

याद रखें, लोन लेना आसान है लेकिन उसे सही तरीके से चुकाना ही असली समझदारी है। इसलिए हमेशा सोच-समझकर और अपनी क्षमता के अनुसार ही लोन लें, ताकि आप बिना किसी परेशानी के अपने लक्ष्य हासिल कर सकें।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1.लोन लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

लोन लेने से पहले ब्याज दर, EMI, लोन अवधि (Tenure), प्रोसेसिंग फीस और अपनी चुकाने की क्षमता (Repayment Capacity) को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।

Q2. EMI क्या होती है और कैसे काम करती है ?

EMI (Equated Monthly Installment) वह तय मासिक किस्त होती है, जो आप हर महीने बैंक को चुकाते हैं। इसमें मूलधन (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों शामिल होते हैं।

Q3.Fixed और Floating Interest Rate में क्या अंतर है ?

Fixed Interest Rate में ब्याज दर पूरी अवधि के लिए समान रहती है, जबकि Floating Interest Rate बाजार के अनुसार बदलती रहती है।

Q4.कौन सा लोन सबसे सस्ता होता है? ?

आमतौर पर होम लोन (Home Loan) सबसे सस्ता होता है क्योंकि इसमें ब्याज दर कम होती है, जबकि पर्सनल लोन (Personal Loan) महंगा होता है।

Q5. EMI कितनी होनी चाहिए?

आपकी EMI आपकी मासिक आय का लगभग 30% से 40% तक होनी चाहिए, ताकि आप बिना तनाव के लोन चुका सकें।

Q6. लोन की सही अवधि (Tenure) कैसे चुनें?

अगर आपकी आय स्थिर है तो कम अवधि चुनें ताकि ब्याज कम लगे। अगर आय कम या अनिश्चित है, तो लंबी अवधि चुन सकते हैं जिससे EMI कम हो जाती है।

Q7. क्या ज्यादा अवधि का लोन लेना सही है?

ज्यादा अवधि का लोन लेने से EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। इसलिए अपनी जरूरत और क्षमता के अनुसार ही निर्णय लें।

Q8. क्या लोन जल्दी चुकाना फायदेमंद है?

हाँ, अगर आप लोन जल्दी चुका देते हैं तो आपको कम ब्याज देना पड़ता है और आप जल्दी कर्ज मुक्त हो जाते हैं।

Q9. लोन लेने से क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?

अगर आप समय पर EMI चुकाते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है, लेकिन लेट पेमेंट या डिफॉल्ट करने से स्कोर खराब हो सकता है।

Q10. क्या लोन पर छुपे हुए चार्जेस भी होते हैं?

हाँ, कई बार प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्जेस, और लेट पेमेंट पेनल्टी जैसे hidden charges होते हैं, इसलिए पहले से जानकारी लेना जरूरी है।

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