म्युचुअल फंड सही है , यह हमे हर जगह सुने को मिलता है | लेकीन आखिर म्युचुअल फंड है क्या ? , यह हमे कोई नही बताता | इसलिये हम आज इस ब्लॉग मे हम म्युचुअल फंड के बारे मे जानेगे |
कई निवेशक सीधे शेअर बाजार मे निवेश करने से बचते है | इसका एक कारण यह है , कि उन्हे शेअर बाजार के बारे में ज्यादा जानकारी नही होती और दुसरा कारण यह है , कि उनके पास शेअर बाजार मे मौजूद कंपनीयो का अध्ययन करने और उसके अनुसार निर्णय लेने का समय नही होता |ऐसे निवेशको के लिये म्युचुअल फंड मे निवेश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है |
म्युचुअल फंड क्या है ?
जब कई निवेशक बड़ी संख्या में एक साथ आते हैं और अपनी धनराशि को शेयर बाजार और उससे संबंधित निवेश विकल्पों में लगाते हैं, तो यह सभी के लिए लाभदायक हो सकता है। क्योंकि जरूरी नहीं कि किसी एक व्यक्ति के पास शेयर बाजार और उससे संबंधित निवेश विकल्पों में निवेश करने के लिए पर्याप्त धन हो, लेकिन जब कई ऐसे लोग एक साथ आते हैं और अपनी सारी धनराशि किसी विशेषज्ञ को निवेश करने के लिए देते हैं, तो वित्तीय सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, चूंकि यह संयुक्त राशि अपेक्षाकृत बड़ी होती है, इसलिए विशेषज्ञ इसे विभिन्न निवेश विकल्पों में भी निवेश कर सकता है।
म्युचुअल फंड कि संरचना
म्यूचुअल फंड्स एक तरीके से निवेश का एक तरीका
है जहां पे आपके पास आप जो है बहुत छोटी –छोटी राशी है, बड़ा अमाउंट नहीं है, तो
म्यूचुअल फंड्स ऐसे ही छोटी –छोटी राशी को इन्वेस्टर्स से लेती है और उनको बड़ी
कंपनीज में जो है इन्वेस्ट कर देती है | म्यूचुअल फंड्स मे सेबी का रेगुलेशन 1996 से निश्चित किया
गया है | म्यूचुअल फंड को एक संस्था की रूप
में स्थापना कि जाती है , क्योंकि यहां पे
हमारे यानी निवेशक के जो कि छोटे-छोटे निवेशक हैं , उनके पैसे कि भागीदारी होती है और उनके पैसों को लिया जाता है इसीलिए वो
पैसे जो लिए जाते है , उनका विश्वास होना बहुत जरूरी होता है | इसीलिए म्यूचुअल फंड को एक संस्था के रूप मे
किया जाता है | संस्था का मतलब जो निवेशको कि राशी की रखवाली करना , या फिर राशी को
सही रूप में प्रयोग करना है | ऐसा नहीं है
निवेशको कि राशी का उपयोग गलत करना है , इसलिये एक विश्वासू संस्था के रूप मे किया
जाता है | निवेशको को से ली गई राशी को उनको यूनिट्स के माध्यम से बेचते है और वह पैसों को कहीं और किसी और इन्वेस्टमेंट में
लगाया जा सके या किसी बड़ी कंपनी की सिक्योरिटीज ली जा सके |
म्यूचुअल फंड के सरचना मे मुख्य रूप से ५ भाग होते है |
१. Sponsor (प्रायोजक) –
म्यूचुअल फंड रचनात्मक होता है | एक संस्था के रूप है , जो कि द इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1828 के अंदर आता है | SEBI से अनुमति लेकर विश्वास बनाता है | म्युचुअल फंड मे sponser का महत्वपूर्ण योगदान होता है | म्यूचुअल फंड इंडिविजुअल हो सकता है , या फिर एक बॉडी कॉर्पोरेट हो सकती है | प्रायोजक (Sponsor ) म्यूचुअल फंड कि स्थापना करते है | दूसरे किसी व्यक्ती को मिला कर के भी कर सकते है | दूसरे किसी बॉडी कॉर्पोरेट को भी मिला कर के कर सकते है | प्रायोजक (Sponsor ) एक बॉर्ड ऑफ ट्रस्टीस बनाता है | म्युचुअल फंड का ४० % का कॅपिटल sponser को AMC के रूप मे करनी पडती है |
उदाहरण: AXIS Mutual Fund का Sponsor = AXIS BANK LTD है
|
२.Trust (संस्था ) -
म्युच्युअल फंड को एक संस्था के रूप में स्थापित किया जाता है | SEBI से अनुमति लेकर
संस्था बनती है | संस्था (Trust ) म्यूचुअल फंड की
प्रॉपर्टी होती है , उसको होल्ड करती है | जो भी पैसे डाल रहा है , छोटा-मोटा निवेशक
उस कंपनी में उसके फायदे बने रहे , तो इसीलिए जो यूनिट होल्डर है उनके फायदे बने
रहे | संस्था निवेशकों के
हितों की रक्षा करता है |
३.Trustees (ट्रस्टी) -
म्यूचुअल
फंड्स मे ट्रस्टी जो है , म्यूचुअल फंड के सारे एसेट को कंट्रोल करती है और होल्ड
करती है | ताकि किसी के साथ कुछ धोखाधड़ी ना हो | फंड
सही तरीके से चल रहा है या नहीं और AMC नियमों के अनुसार काम कर रही है या
नहीं यह देखने का काम होता है | Trustees सेबी
के नियम के अनुसार काम करते हैं |
४ .AMC – Asset Management Company
एसेट
मैनेजमेंट कंपनी Trustees (ट्रस्टी) के द्वारा चुना जाता है | एसेट मैनेजमेंट
कंपनी SEBI के माध्यम से जुडी होनी चाहिए | एसेट
मैनेजमेंट कंपनी बहुत सी ऐसी चीजें देखती है ,कि जैसे कि लोगों का इन्वेस्टर्स का
पैसा आ रहा है | उसको कहां डायवर्सिफाई करना है ,उसको कहां लगाना है | जो निवेशक का
छोटा-छोटा पैसा आया है, थोड़ा-थोड़ा पैसा आया है ,उसको एक बड़े राशी में बदलकर
दूसरी सिक्योरिटीज में डायवर्सिफाई करना है | एसेट मैनेजमेंट कंपनी ५० % स्वतंत्र होनी चाहिये |
५.Custodian (कस्टोडियन) -
Custodian
निवेश से जुड़े संपत्ती को सुरक्षित रखता है और शेअर,
बॉण्डस आदि की सुरक्षित करता है | Custodian
का मुख्य उद्देश फंड को धोखे से सुरक्षित रखना है |
म्युच्युअल फंड के प्रकार –
हमारे भारत देश में, सिक्योरिटीज एंड
एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने म्यूचुअल फंड को आम तौर पर इन चार प्रकारों में बांटा है:
१ . इक्विटी म्युच्युअल फंड (Equity Mutual Fund )-
यह फंड
सीधे स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं और
इसलिए स्वाभाविक रूप से रिस्की होते हैं। बेशक, इनमें अच्छा
रिटर्न देने की क्षमता होती है। ये फंड आमतौर पर उन निवेशक के लिए सही होते हैं , जो पांच साल या उससे ज़्यादा समय के लिए निवेश करते हैं।
२.डेट म्युच्युअल फंड (Debt Mutual Fund) –
ऐसे फंड डेट सिक्योरिटीज और बॉन्ड जैसे
सुरक्षित इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में इन्वेस्ट करते हैं। इसलिए, इनमें निवेश
करना काफी सुरक्षित रहता है। ऐसे फंड उन निवेशको के लिए सही होते हैं जो कम समय के
लिए निवेश करते हैं। यह फंड स्टेबल रिटर्न
देता है | इस फंड मे जोखीम कम रहती है |
३.हायब्रीड म्युच्युअल फंड (Hybrid Mutual Fund) –
यह फंड
स्टॉक मार्केट और डेट सिक्योरिटीज दोनों
में निवेश करते हैं | डेट फंड की
तुलना में ज़्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर, इन
फंड में इक्विटी फंड की तुलना में कम रिस्क भी होता है।
४ .इंडेक्स
म्युच्युअल फंड (Index
Mutual Fund) –
इंडेक्स म्यूचुअल फंड एक
ऐसा म्यूचुअल फंड होता है , जो किसी मार्केट इंडेक्स (जैसे Nifty 50 या Sensex) को फॉलो करता है।इस फंड का उद्देश्य
इंडेक्स के प्रदर्शन जैसा ही रिटर्न देना होता है। लंबे समय के निवेश के लिए यह एक सरल
और अच्छा विकल्प माना जाता है।
म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है ?
निवेशक म्यूचुअल फंड में SIP तथा
Lump Sum तरीके से पैसा
लगाते हैं | सभी
निवेशकों का पैसा मिलकर एक बड़ा फंड बनता है। फंड
मैनेजर इस पैसे को बाजार में निवेश करता है। निवेश
से जो मुनाफा या नुकसान होता है, वह सभी निवेशकों में उनके निवेश के अनुपात
में बाँटा जाता है। हर निवेशक को उसके निवेश के बदले युनिट के
रूप मे मिलती
हैं, जिनकी कीमत NAV (Net Asset Value) कहलाती है।
उदाहरण:
मान लीजिए 100 लोग हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं। कुल ₹1,00,000 का फंड बना। फंड मैनेजर इसे
शेयर बाजार में लगाता है। अगर निवेश बढ़ता है तो NAV बढ़ती है और निवेशकों को फायदा होता है;
अगर बाजार गिरता है तो नुकसान भी हो
सकता है।
Mutual Fund में निवेश करने के फायदे
1 . प्रोफेशनल मैनेजमेट (Professional Management)
म्यूचुअल फंड में हमारा पैसा अनुभवी और अहर्ता प्राप्त फंड मैनेजर द्वारा निवेश किया जाता है। ये प्रबंधकों बाजार अनुसंधान, कंपनी का प्रदर्शन और आर्थिक स्थितियाँ को विश्लेषण करके निवेश का फैसला लेते हैं। इससे आम निवेशक को खुद रीसर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती।
2 . Diversification (जोखिम कम होता है)
म्यूचुअल फंड में हमारा पैसा सिर्फ एक कंपनी में नहीं बल्कि कई कंपनियों और क्षेत्रों में लगाया जाता है। अगर किसी एक कंपनी
का प्रदर्शन खराब भी
हो जाए, तो बाकी निवेश
नुकसान को balance
कर लेते
हैं। इससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
3. कम पैसों से शुरुआत
म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने के लिए ज्यादा राशी
की जरूरत नहीं होती। आप SIP के जरिए ₹500 या ₹1000 प्रति माह से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। यह
सुविधा विद्याथी , नौकरी करने वाले लोग और छोटे निवेशको के लिये बहुत फायदेमंद है।
4 . ज्यादा समय में Wealth Creation
म्यूचुअल फंड ज्यादा समय के निवेश के लिए सबसे अच्छा पर्याय माना जाता है। लंबे समय तक निवेश करने पर चक्रवाढ पद्धती का फायदा मिलता है, जिससे आपकी छोटी-छोटी सेविंग भविष्य में एक बड़ी संपत्ति बना सकती हैं।
5. SIP की सुविधा
SIP
(Systematic Investment Plan) के जरिए आप हर महीने एक निश्चित
राशी निवेश कर सकते
हैं। इससे निवेश की आदत विकसित होती है | बाज़ार समय की तनाव नहीं रहता |
rupee cost
averaging का फायदा
मिलता है |
निष्कर्ष -
अगर हम कम पैसों से निवेश शुरू करना चाहते हैं और भविष्य में अच्छा फंड बनाना चाहते
हैं, तो म्युचुअल
फंड हमारे लिए एक अच्छा विकल्प है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1. म्यूचुअल फंड क्या है?
Mutual Fund एक ऐसा निवेश माध्यम है , जिसमें कई निवेशकों का पैसा इकट्ठा करके शेयर, बॉन्ड और अन्य साधनों में लगाया जाता है।
Q2. म्यूचुअल फंड के सरचना मे मुख्य रूप कोनसे होते है ?
म्यूचुअल फंड के सरचना मे मुख्य रूप से ५ भाग होते है | 1.Sponsor (प्रायोजक) 2.Trust (संस्था )3.Trustees (ट्रस्टी) 4.AMC – Asset Management Company 5.Custodian (कस्टोडियन)
Q3. म्युच्युअल फंड के प्रकार कोन से है ?
1.इक्विटी म्युच्युअल फंड (Equity Mutual Fund ) 2..डेट म्युच्युअल फंड (Debt Mutual Fund) ३.हायब्रीड म्युच्युअल फंड (Hybrid Mutual Fund) ४ .इंडेक्स म्युच्युअल फंड (Index Mutual Fund)



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